Sunday, January 8, 2012

जो बोया था, वही मै काटा.

जो कुछ पाया इस जग से,
संचित उसीको कर पाया.
मिला प्यार से जो भी जग में,
उसीसे झोली भर पाया.

किसी से हर पल का प्यार मिला, 
जग में जीने का अधिकार मिला,
इस जग में हीं मेरा परिवार मिला, 
जग से हीं जीने का संस्कार मिला,
रोटी  मिली, रोजगार मिला,
घर-बार मिला, संसार मिला.

सबकुछ है इस जग का,
फिर सबको क्यों अपना माना ?
बनी समस्या इस जग की,
जब मैंने सबको अपना जाना.

मेरा-तेरा से अंतर्मन में, 
हुई स्वार्थ की उत्पति, 
हुए पराये अपने सब,
तृष्णा बनकर आई  बिपत्ति. 

नफरत मिला, तिरस्कार मिला,
क्रोध मिला, प्रतिकार मिला.
किसी से गाली का उपहार मिला,
अपनों से गैरों सा व्यबहार मिला.

जो भी मिला,
वही मै बांटा,
जो बोया था,
वही मै काटा.